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बिछड़ कर

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अंतिम चार पंक्तियाँ  श्री शशि भूषण जी  के द्वारा सुझाई गयी है।

श्री शशि भूषण आपके सुझाव के लिए एक बार फिर से “धन्यवाद”। आपकी प्रतिक्रिया अनमोल है और प्रोत्साहित करती है।

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जो कुटुंब से बिछड़ कर चला गया।

दूर देश जा कर बस गया॥

वो दूर है तो भी क्या हुआ।

चलो उसका तो भला हुआ॥

दूर हो गया कुछ साथों से।

मुक हो गया वो बातों से॥

कुछ आखें नम हुई तो क्या हुआ।

चलो उसका तो भला हुआ॥

जिन हाथों ने उसके आसूँ पोछे थे।

जिन आँखों ने उसमें सपने देखे थे॥

उन लोगों को छोड़ गया तो क्या हुआ।

चलो उसका तो भला हुआ॥

समय जब खुद को दोहरायेगा,
किया हुआ अपना याद आयेगा !
उस दिन सोचेगा कुछ गलत हुआ !
खैर, चलो उसका तो भला हुआ॥



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shashibhushan1959 के द्वारा
July 6, 2012

भई वाह ! बहुत खूब ! “”फिर वो भी तो कभी सीचेगा सपनों को। और देखेगा दूर जाते नए कदमों को॥ और फिर शायद सोचे की कुछ तो गलत हुआ। खैर, चलो उसका तो भला हुआ॥”" “फिर वो भी तो कभी सीचेगा सपनों को।” इस पंक्ति का सामंजस्य मैं समझ नहीं पाया !

    dalveermarwah के द्वारा
    July 6, 2012

    शशि भूषण जी, सबसे पहले आपका धन्यवाद। कुछ पंक्तीय आपको पसंद आयी। कुछ भावनाएं थी मन में की किस तरहा हम career के मद में बहुत कुछ पीछे छोड़ चल देते है, अपनी जमीन से दूर अपने घर से दूर एक सुनहरे भविष्य के लिए। और शायद हमारे परिवार खुद को समझा लेते हैं की चलो भला हुआ, दूर देश में जाकर बच्चा खुश होगा, ऊंचा उठेगा। “फिर वो भी तो कभी सीचेगा सपनों को।” पंक्ति उस दूर जा चुके बच्चे के लिए है जो अपने बच्चों की भी परवरिश करेगा और उन्हे बड़ा करेगा, एक आशा रखेगा उनसे। पर बहुत मुमकिन है की उसे भी बच्चों से दूर होना पड़ेगा उनके भविष्य के लिए। अगली पंक्ति में कहने की कोशिश की है… “और देखेगा दूर जाते नए कदमों को॥” और फिर मेरा यह मानना है की, जब उसे अहेसास होगा की उसने भी कभी ऐसा किया था, तब शायद उसे लगे की कुछ गलत हो गया लगता है। अपने वृद्ध माता पिता के पास न होना जब ही शायद उन्हे बच्चे की जरूरत हो… मुझे लगता है गलत बात है। खास कर भारत में जहां पर एक तो culture में, सामाजिक ढ़ाचे में बुजुर्ग अपने बच्चों पर निर्भर हो जाता है। और भारत में मेडिकल और senior citizen care सुविधाएं इतनी अच्छी नहीं है। कविता में लगता है कुछ कमी है, कोशिश करूंगा की पूरी हो सके। आपका आभारी, दलवीर।

    shashibhushan1959 के द्वारा
    July 7, 2012

    आदरणीय दलवीर जी, सादर ! काव्य की प्रत्येक पंक्ति अपने भाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती हुई होनी चाहिए ! इससे काव्य की सुन्दरता और बोधगम्यता बढ़ जाती है ! “समय जब खुद को दोहरायेगा, किया हुआ अपना याद आयेगा ! उस दिन सोचेगा कुछ गलत हुआ ! खैर, चलो उसका तो भला हुआ॥”” (क्षमाप्रार्थना के साथ, यह केवल सुझाव है ! आशा है अन्यथा न लेंगे !) इस विषय पर अभी और बहुत कुछ लिखा जा सकता है !

    dalveermarwah के द्वारा
    July 7, 2012

    नमन शशी भूषण जी, मुझे आपका सुझाव बेहद पसंद आया। आपकी अनुमति से सुझाव को कविता में सम्मालित करना चाहूँगा।  आभारी दलवीर।

    shashibhushan1959 के द्वारा
    July 7, 2012

    अनुमति की आवश्यकता ही नहीं, अधिकार सहित प्रयोग करें !

    dalveermarwah के द्वारा
    July 7, 2012

    धन्यवाद! ऐसे ही प्रोत्साहित करते रहे। आपकी लिखी पंक्तियाँ मेरी कविता का हिस्सा बन गयी है। और कविता का पहले से ज्यादा निखार रही है। आपका आभारी, दलवीर। 


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