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यह एक खवाब है

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खुद को समझाओ की ये वो नहीं है।
यह एक खव्ब है, कोई सच्चाई नहीं है॥

उसकी बातों में न आ जाना तुम।
बात कुछ और है, जो बताई नहीं है॥

फिर वो चले आए मेरी महफिल में।
दास्तां-ए-बेवफ़ाई हमने भुलाई नहीं है॥

उनका दिल तोड़ कर बस युही चले जाना।
यह तो मौत है, जुदाई नहीं है॥

कभी मुसकुराना और युही रूठ जाना।
गुत्थी इश्क़ ही अभी तक सुलझाई नहीं है॥

की दूर रहना ही मुनासिब है इन नाज़्नीनों से।
बात हमने खुद जानी है, किसी ने बताई नहीं है॥



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
June 29, 2012

उसकी बातों में न आ जाना तुम। बात कुछ और है, जो बताई नहीं है॥

    Dalveer Marwah के द्वारा
    July 4, 2012

    बहुत आभारी, की आपको यह पंक्तियाँ पसंद आयी।

pritish1 के द्वारा
June 28, 2012

खुद को समझाओ की ये वो नहीं है। अच्छी पंक्तियाँ मेरी कहानी ऐसी ये कैसी तमन्ना है……..3 में अपने विचार प्रस्तुत करें आपका मित्र प्रीतीश

    Dalveer Marwah के द्वारा
    July 4, 2012

    धन्यवाद प्रितिश। मैं, आपकी कहानी पढ़ रहा हूँ। अपनी प्रतिक्रिया अवश्य व्यक्त करूंगा।


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