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आजाद देश के गुलाम बच्चे

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एक हरे भरे पेड़ से टूटे सूखे पत्ते है हम।

इस आजाद देश के गुलाम बच्चे है हम॥

पैसे, शोहरत, ताकत, सत्ता, कुर्सी के भूखे हैं।

दिमाग से शातिर पर अक्ल से कच्चे है हम॥

खोखला किए जाते है देश की जड़ों को

देश के दुश्मन है फिर कैसे सच्चे है हम?

इस आजाद देश के गुलाम बच्चे है हम



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
June 29, 2012

हकीकत  बयां करती, सुन्दर एवं छोटी सी कविता…..

    Dalveer Marwah के द्वारा
    July 4, 2012

    सरहाना के लिए धन्यवाद। कहीं न कहीं मैं भी वो बच्चा हूँ। प्रयास जारी है मजबूत जड़ बनने की।

santosh kumar के द्वारा
June 28, 2012

दलवीर जी ,.सादर अभिवादन छोटी सी रचना में बहुत कुछ कह दिया आपने ,..हार्दिक आभार

    Dalveer Marwah के द्वारा
    July 4, 2012

    धन्यवाद। बहुत आभारी हूँ, की आपको मेरी लिखी कविता पसंद आयी।


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