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सब कुछ थम सा गया है वादियों में

Posted On: 27 Jun, 2012 Others में

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सब कुछ थम सा गया है वादियों में
आकाश गहरा सा रंग ले कर गहराता ही जाता है।
और कभी एकदम साफ दिखाई देता है रुई से बादलों के साथ खेलता हुआ॥
बादल भी रमते जोगी की तरहा आवारा बहता जाता है।
आह! इतना लुभावन दृश्य मन को भाता है॥

ऊंचे ऊंचे नीलगिरी के वृक्ष जाने कितनों सालों से यूहीं खड़े है।
कई लाखों होंगे शायद की नज़र से कभी दूर ही नहीं होते॥
और हरयाली बिखेरते चाय के बागान घाटी की चादर है शायद।
यह सुंदर दृश्य सृष्टि के कभी बंद नहीं होते॥

रात की आगोश में वादी और सुहानी हो जाती है।
मैंने सुनी है, उसकी खामोशी, उसकी खुसफुसाहट॥
और दूर दिखते है पर्वत के किनारे जिनसे वादी घिरी है।
और वादी की खुशबू हवा को और रूमानी करती है॥

मन करता है की एक छाया बनकर रात के अंधेरे से मिल जाऊँ।
और हर सुबह किरण बनकर वादियों को रौशन कर दूँ॥
बारिश की बूंदें बनकर गिरि पर गिरूँ और वादियों में बह जाऊँ।
मन करता है की में बस यहीं बस जाऊँ, थम जाऊँ॥



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pritish1 के द्वारा
June 27, 2012

सब कुछ थम सा गया वादियों मैं लिखते रहिये……..सप्रेम मेरी लिखी कहानी पढें ऐसी ये कैसी तमन्ना है……3 आप इसके पहले दो भाग का आनंद भी ले सकते हैं….. featured जागरण ब्लॉग में है……….

    Dalveer Marwah के द्वारा
    June 28, 2012

    धन्यवाद प्रितिश जी।


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