नए कदम

हार्दिक स्वागत

40 Posts

57 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5086 postid : 63

मेरी नाव

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मझधार में फँसी मेरी नाव लगती है।

कभी चलती कभी रुकती मेरी नाव लगती है॥

 

किनारा ताकता रहा जब घाट छोड़ा था।

पता था दूर हो गया हूँ हर सहारे से॥

एक पतवार ही है आशा मेरे इस सफर में।

मेरे जीवन की कहानी मेरी नाव लगती है॥

 

कभी उसको दिशा  दूँ  कभी वो मुझको दिशा दे।

कभी किनारो से दूर करदे कभी किनारा दिखा दे॥

कभी भावर मे फसती फिर बचा लेती है मुझे को।

मेरी समझ से भी समझदार मेरी नाव लगती है॥

 

मैंने हर समान खो दिया जीवन की नदी में।

वो सुहाना समय बीत गया धारा की गति में॥

जो किनारे पहचानता था वो पीछे छूट गए।

अब नए साहिल की तलाश में मेरी नाव लगती है॥

 

मझधार में फँसी मेरी नाव लगती है।

कभी चलती कभी रुकती मेरी नाव लगती है॥

| NEXT



Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

anamika के द्वारा
June 20, 2011

बहुत खूब

    dalveermarwah के द्वारा
    June 25, 2011

    धन्यवाद अनामिका जी।


topic of the week



latest from jagran