नए कदम

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ये शहर

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मेरे शहर में मेरे नाम से तुम न रहना।

बदनाम हो जाओगे तो फिर न कहना॥

 

मुझे पता है तुम्हारे कई मुरीद है।

वो भी नजर चुराए तो फिर न कहना॥

 

बहुत आसान है इसकी रंगत मे खोजना।

ये झिलमिल करती चकाचोंध मे बहजाना॥

 

कई शाम बीत जाती है इसको समझने मे।

गर खुद को भूल जाओ तो फिर न कहना॥

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abodhbaalak के द्वारा
April 28, 2011

दलवीर जी सुन्दर प्रयास, ऐसे ही लिखते रहें … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    dalveermarwah के द्वारा
    April 28, 2011

    नमस्ते अबोध जी, आपके प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद। ये नए कदम है। :)

malkeet singh jeet के द्वारा
April 28, 2011

बहुत अच्छा लिखा आपने सुंदर रचना http://jeetrohann.jagranjunction.com/2011/04/26/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A3%E0%A5%80/

    dalveermarwah के द्वारा
    April 28, 2011

    नमस्ते मलकीत जी, खुशी हुई की प्रयास आपको पसंद आया।


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