नए कदम

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dalveermarwah


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समझना मुश्किल

Posted On: 16 Dec, 2015  
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Others कविता मस्ती मालगाड़ी में

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बेरंग

Posted On: 2 Dec, 2014  
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Celebrity Writer Contest कविता में

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नए समझ सोच को पिरोना ही है

Posted On: 8 Mar, 2014  
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Celebrity Writer Contest Others में

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बात यह राज़ कि छुपाई उसने

Posted On: 19 Feb, 2014  
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Contest Others कविता में

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दीवानी

Posted On: 30 Dec, 2013  
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Contest Others कविता में

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चाँद और चांदनी

Posted On: 30 Dec, 2013  
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Entertainment Others कविता में

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गलत

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लहू की लकीरें

Posted On: 30 Jul, 2012  
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Others न्यूज़ बर्थ मस्ती मालगाड़ी लोकल टिकेट में

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के द्वारा: Ritu Gupta Ritu Gupta

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति" शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति"

के द्वारा: abhishek shukla abhishek shukla

शशि भूषण जी, सबसे पहले आपका धन्यवाद। कुछ पंक्तीय आपको पसंद आयी। कुछ भावनाएं थी मन में की किस तरहा हम career के मद में बहुत कुछ पीछे छोड़ चल देते है, अपनी जमीन से दूर अपने घर से दूर एक सुनहरे भविष्य के लिए। और शायद हमारे परिवार खुद को समझा लेते हैं की चलो भला हुआ, दूर देश में जाकर बच्चा खुश होगा, ऊंचा उठेगा। “फिर वो भी तो कभी सीचेगा सपनों को।" पंक्ति उस दूर जा चुके बच्चे के लिए है जो अपने बच्चों की भी परवरिश करेगा और उन्हे बड़ा करेगा, एक आशा रखेगा उनसे। पर बहुत मुमकिन है की उसे भी बच्चों से दूर होना पड़ेगा उनके भविष्य के लिए। अगली पंक्ति में कहने की कोशिश की है... "और देखेगा दूर जाते नए कदमों को॥" और फिर मेरा यह मानना है की, जब उसे अहेसास होगा की उसने भी कभी ऐसा किया था, तब शायद उसे लगे की कुछ गलत हो गया लगता है। अपने वृद्ध माता पिता के पास न होना जब ही शायद उन्हे बच्चे की जरूरत हो... मुझे लगता है गलत बात है। खास कर भारत में जहां पर एक तो culture में, सामाजिक ढ़ाचे में बुजुर्ग अपने बच्चों पर निर्भर हो जाता है। और भारत में मेडिकल और senior citizen care सुविधाएं इतनी अच्छी नहीं है। कविता में लगता है कुछ कमी है, कोशिश करूंगा की पूरी हो सके। आपका आभारी, दलवीर।

के द्वारा: dalveermarwah dalveermarwah

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